मंगलवार, मई 24, 2011

लघु कथा - 8

                         हैसियत वाला भिखारी                    
 प्रभु दयाल मेहता घर में आए मेहमानों के साथ बातें कर रहे था , इतने में भिखारी ने जैसे ही मांगने के लिए आवाज़ लगाई ,वह खड़ा होकर भिखारी को डांटने लगा - " भाग जा ... हट्टा-कट्टा है ,काम धंधा किया कर ."
              प्रभु दयाल बडबडाता हुआ मेहमानों के साथ फिर आ बैठा ." इन लोगों का कोई ईमान-धर्म नहीं , जमीर तो बिलकुल मरा हुआ है  ,मांगने में शर्म महसूस नहीं करते .
' छोडो भी मेहता जी बात आगे करो .'- किशोरी लाल ने चाय का कप मेज पर रखते हुए कहा .
" जी , हमारी हैसियत और लडके की काबिलियत देखते हुए आप कम थोड़े ही करेंगे .कम-से-कम बीस तोले सोना और बीस लाख नगद के अतिरिक्त लडके की पसंद सफारी कार है .इतना ही विशेष है ,बाकि जरूरत का सामान तो आप देंगे ही "- प्रभु दयाल ने बात स्पष्ट की .
          किशोरी लाल सोच में पड़ गया .इस भिखारी और उस भिखारी में कितना अंतर है .वह गरीब भिखारी था और यह हैसियत वाला भिखारी है .

                           * * * * *

4 टिप्‍पणियां:

  1. bilkul sahi kaha aapne.dahej ke lobhi in hansiyat wale bhikariyon ka kya karen.sadak wale bhikariyon ko to gussa karake bhaga bhi sakate hain per in bhikariyon ka muah mangate hue thakata bhi nahi,anootha lekh.badhaai aapko.


    please visit my blog and leave the comments also.thanks

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